मकर की साढ़े साती 2046–2055: तीनों चरण
| चरण | शनि कहाँ | आरंभ | समाप्त |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | शनि धनु में (चंद्र से 12वाँ) | 7 दिस॰ 2046 | 5 मार्च 2049 |
| दूसरा (मध्य) चरण | शनि मकर में (चंद्र पर) | 6 मार्च 2049 | 24 फ़र॰ 2052 |
| तीसरा चरण | शनि कुंभ में (चंद्र से 2रा) | 25 फ़र॰ 2052 | 4 फ़र॰ 2055 |
चरणों की तारीख़ें शनि के पहली बार राशि में आगे बढ़कर प्रवेश करने की हैं। वक्री (उल्टी) चाल में शनि कुछ महीनों के लिए पिछली राशि में लौट सकता है; नीचे पूरी चाल दी गई है।
इस साढ़े साती में शनि की चाल
| तारीख़ | शनि | चाल |
|---|---|---|
| 7 दिस॰ 2046 | धनु | आगे बढ़कर प्रवेश |
| 6 मार्च 2049 | मकर | आगे बढ़कर प्रवेश |
| 10 जुला॰ 2049 | धनु | वक्री होकर वापस |
| 4 दिस॰ 2049 | मकर | आगे बढ़कर प्रवेश |
| 25 फ़र॰ 2052 | कुंभ | आगे बढ़कर प्रवेश |
| 14 मई 2054 | मीन | आगे बढ़कर प्रवेश |
| 2 सित॰ 2054 | कुंभ | वक्री होकर वापस |
| 5 फ़र॰ 2055 | मीन | आगे बढ़कर प्रवेश; साढ़े साती समाप्त |
मकर राशि: वर्ष-दर-वर्ष शनि की स्थिति
| वर्ष | स्थिति |
|---|---|
| 2026 | न साढ़े साती, न ढैया (पूरा वर्ष) |
| 2027 | 1 जन॰ – 2 जून: न साढ़े साती, न ढैया 3 जून – 19 अक्टू॰: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव) 20 अक्टू॰ – 31 दिस॰: न साढ़े साती, न ढैया |
| 2028 | 1 जन॰ – 22 फ़र॰: न साढ़े साती, न ढैया 23 फ़र॰ – 31 दिस॰: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव) |
| 2029 | 1 जन॰ – 7 अग॰: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव) 8 अग॰ – 4 अक्टू॰: न साढ़े साती, न ढैया 5 अक्टू॰ – 31 दिस॰: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव) |
| 2030 | 1 जन॰ – 16 अप्रैल: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव) 17 अप्रैल – 31 दिस॰: न साढ़े साती, न ढैया |
मकर वालों के लिए हर चरण का अर्थ
पहला चरण (शनि धनु में, चंद्र से बारहवाँ): खर्च, यात्रा, नींद में बाधा और अकेलेपन का भाव। पुरानी चीज़ें छूटती हैं; साधना और बचत के लिए अच्छा समय।
दूसरा चरण (शनि मकर में, ठीक चंद्रमा पर): सबसे भारी हिस्सा। ज़िम्मेदारी और थकान बढ़ती है, फल देर से मिलते हैं, मन पर दबाव रहता है। नियमित दिनचर्या, स्वास्थ्य पर ध्यान और बड़े जोखिमों से बचना सहायक है।
तीसरा चरण (शनि कुंभ में, चंद्र से दूसरा): धन, वाणी और परिवार के मामलों में सावधानी। दबाव धीरे-धीरे घटता है और मेहनत का फल दिखने लगता है।
मकर के स्वामी स्वयं शनि हैं, इसलिए परंपरा मानती है कि मकर वालों के लिए साढ़े साती अपेक्षाकृत हल्की रहती है। दूसरे चरण में शनि अपनी राशि मकर में रहता है, इसलिए यह चरण अपेक्षाकृत सहज माना जाता है। तीसरे चरण में शनि अपनी राशि कुंभ में रहता है, इसलिए यह चरण अपेक्षाकृत सहज माना जाता है। आपकी अपनी कुंडली में शनि की स्थिति, दशा और अष्टकवर्ग से असर बहुत बदल जाता है; साढ़े साती हर किसी के लिए बुरी नहीं होती।
मकर पर ढैया (ढाई साल)
ढैया तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव में हो। अगली ढैया:
- ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव): 3 जून 2027 – 16 अप्रैल 2030
- ढैया (अष्टम शनि, आठवाँ भाव): 27 अग॰ 2036 – 12 जुला॰ 2039
मकर की पिछली और आगे की साढ़े साती
| अवधि | आरंभ | मध्य चरण | समाप्त |
|---|---|---|---|
| 2017–2025 | 26 जन॰ 2017 | 24 जन॰ 2020 | 28 मार्च 2025 |
साढ़े साती के उपाय
- शनिवार को सरसों या तिल के तेल का दीया जलाएँ और हनुमान चालीसा पढ़ें।
- मंत्र: “ॐ शं शनैश्चराय नमः”, शनिवार को 108 बार।
- शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द या ज़रूरतमंद को जूते-चप्पल दान करें।
- बुज़ुर्गों, मज़दूरों और सेवा-कर्मियों की मदद करें; शनि ईमानदार परिश्रम से प्रसन्न होते हैं।
- पीपल के पेड़ को शनिवार को जल चढ़ाएँ और दीया जलाएँ।
रत्न (जैसे नीलम) बिना अपनी पूरी कुंडली दिखाए न पहनें।
अपनी कुंडली से देखें। दोष जाँच में जन्म-विवरण भरकर अपनी सटीक साढ़े साती तिथियाँ देखें, या मकर का 2026–27 गोचर फल पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अभी मकर राशि पर साढ़े साती है?
नहीं। अभी मकर की स्थिति: न साढ़े साती, न ढैया। अगली साढ़े साती 7 दिस॰ 2046 से शुरू होगी।
क्या 2026 में मकर राशि पर साढ़े साती है?
नहीं। 2026 में मकर पर साढ़े साती नहीं है। उस वर्ष की स्थिति: न साढ़े साती, न ढैया (पूरा वर्ष)।
क्या 2027 में मकर राशि पर साढ़े साती है?
नहीं। 2027 में मकर पर साढ़े साती नहीं है। उस वर्ष की स्थिति: 1 जन॰ – 2 जून: न साढ़े साती, न ढैया; 3 जून – 19 अक्टू॰: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव); 20 अक्टू॰ – 31 दिस॰: न साढ़े साती, न ढैया।
क्या 2028 में मकर राशि पर साढ़े साती है?
नहीं। 2028 में मकर पर साढ़े साती नहीं है। उस वर्ष की स्थिति: 1 जन॰ – 22 फ़र॰: न साढ़े साती, न ढैया; 23 फ़र॰ – 31 दिस॰: ढैया (कंटक शनि, चौथा भाव)।
मकर की अगली साढ़े साती कब है?
अगली साढ़े साती 7 दिस॰ 2046 से 4 फ़र॰ 2055 तक रहेगी। शनि को बारहों राशियों का चक्कर लगाने में लगभग 29½ वर्ष लगते हैं, इसलिए साढ़े साती लगभग हर तीस वर्ष में लौटती है।
क्या यह मेरी लग्न राशि से देखी जाती है या चंद्र राशि से?
साढ़े साती जन्म के समय चंद्रमा की राशि (चंद्र राशि) से देखी जाती है, लग्न या सूर्य राशि से नहीं। अपनी चंद्र राशि नक्षत्र खोजक में देखें।
दूसरी राशियों की साढ़े साती
ज्योतिष एक पारंपरिक पद्धति है, विज्ञान नहीं। इसे शनि की चाल के कैलेंडर की तरह देखें, और किसी बड़े निर्णय से पहले किसी भरोसेमंद ज्योतिषी से बात करें।